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चढ़ावा चोरी मामले के बाद हिमाचल सरकार सख्त, मंदिरों के लिए नए निर्देश

हिमाचल सरकार ने मंदिरों में सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए सख्त निर्देश जारी किए
दान पेटियों, सीसीटीवी, वीडियोग्राफी और डिजिटल रिकॉर्ड अनिवार्य किए गए
30 दिन में अनुपालन रिपोर्ट देनी होगी, लापरवाही पर होगी कानूनी कार्रवाई


शिमला। अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और हेराफेरी के मामले के बाद हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के सरकारी स्वामित्व एवं प्रबंधन वाले मंदिरों में सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सचिव भाषा, कला एवं संस्कृति राकेश कंवर की ओर से जारी आदेशों में मंदिरों में चढ़ावे, नकदी, गहनों और अन्य कीमती सामान की सुरक्षा व्यवस्था की तत्काल समीक्षा कर उसे और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार ने कहा है कि जिला मजिस्ट्रेट यह सुनिश्चित करेंगे कि राज्य के अन्य मंदिर भी सुरक्षा और पारदर्शिता से जुड़े ऐसे ही नियंत्रण लागू करें। जिन मंदिरों का संचालन सीधे जिला प्रशासन के अधीन नहीं है, उनकी प्रबंधन समितियों को भी श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखने के लिए उचित सुरक्षा व्यवस्था अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

सरकार ने निर्देश दिए हैं कि सभी दान पेटियां छेड़छाड़-रोधी हों और उन्हें मजबूत तरीके से स्थापित किया जाए। प्रत्येक दान पेटी का अलग पहचान नंबर होगा। चाबियों के लिए डुअल लॉक या मल्टी-की सिस्टम लागू किया जाएगा तथा उनकी कस्टडी का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा। दान पेटियों की मरम्मत या बदलाव का भी दस्तावेजी रिकॉर्ड अनिवार्य होगा।

दान पात्र केवल अधिकृत तिथि पर अधिसूचित समिति की मौजूदगी में ही खोले जाएंगे। गिनती के दौरान कार्यकारी अधिकारी, जिला प्रशासन का प्रतिनिधि, लेखा अधिकारी, मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्य और स्वतंत्र गवाह मौजूद रहेंगे। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाएगी और गिनती वाला कमरा सीसीटीवी निगरानी में रहेगा।

मंदिर परिसरों में हाई-रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जिनमें नाइट विजन और ऑडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा होगी। कैमरे प्रवेश और निकास द्वार, दान पेटियां, गर्भगृह के आसपास, गिनती कक्ष और स्ट्रांग रूम सहित सभी महत्वपूर्ण स्थानों को कवर करेंगे। सीसीटीवी फुटेज कम से कम 180 दिनों तक सुरक्षित रखनी होगी। जरूरत पड़ने पर क्लाउड स्टोरेज का भी उपयोग किया जा सकेगा।

दान की गिनती पूरी होने के बाद एक कार्य दिवस के भीतर राशि मंदिर के अधिकृत बैंक खाते में जमा करनी होगी। मंदिर परिसर में बड़ी मात्रा में नकदी रखने की अनुमति नहीं होगी, जब तक विशेष परिस्थितियों में लिखित मंजूरी न हो। सरकार ने जहां संभव हो एक ही बैंक खाते के उपयोग और डिजिटल अकाउंटिंग सिस्टम अपनाने पर जोर दिया है।

सभी सोने-चांदी के गहनों, नकदी, विदेशी मुद्रा और अन्य कीमती वस्तुओं का अलग-अलग रजिस्टर और डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा। प्रत्येक तीन महीने में भौतिक सत्यापन तथा सालाना सत्यापन सरकार द्वारा नामित समिति करेगी। इसके अलावा मासिक आंतरिक जांच, वार्षिक वैधानिक ऑडिट और समय-समय पर अचानक निरीक्षण भी किए जाएंगे।

कैश और कीमती सामान संभालने वाले कर्मचारियों का समय-समय पर रोटेशन किया जाएगा। उनका पुलिस सत्यापन अनिवार्य होगा। यदि किसी निजी एजेंसी की सेवाएं ली जाती हैं, तो उसके कर्मचारियों पर भी यही नियम लागू होंगे। गिनती कक्ष में कर्मचारियों को मोबाइल फोन, बैग या निजी सामान ले जाने की अनुमति नहीं होगी।

सरकार ने श्रद्धालुओं को यूपीआई, क्यूआर कोड, पीओएस मशीन और ऑनलाइन बैंकिंग के माध्यम से दान देने के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए हैं। सभी डिजिटल दान सीधे मंदिर के अधिकृत बैंक खाते में जमा होंगे।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि चोरी, धोखाधड़ी, छेड़छाड़ या किसी भी अनियमितता की सूचना तुरंत पुलिस, डिप्टी कमिश्नर, कार्यपालक मजिस्ट्रेट तथा भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग को देनी होगी। जानकारी छिपाने या रिपोर्ट देने में देरी होने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी स्वामित्व और प्रबंधन वाले सभी मंदिरों को 30 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी। इसमें वर्तमान सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी कवरेज, ऑडिट, इन्वेंट्री, बैंकिंग व्यवस्था, कमियों और सुधारात्मक कार्ययोजना का पूरा विवरण देना होगा। इन निर्देशों के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग के निदेशक को राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी बनाया गया है।